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Multibagger Stock Tips This Pharma Stock Has Doubled Investors Money In One Year Included In The Top Pick Of Axis Securities

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Multibagger Stock: नवंबर 2020 में लिस्टिड ग्लैंड फार्मा (Gland Pharma) के शेयर वर्तमान में अपने आईपीओ इश्यू मूल्य 1,500 प्रति शेयर से बढ़कर 3,830 रुपये प्रति शेयर हो गए हैं, इस अवधि के दौरान निवेशकों का पैसा दोगुना हो गया है. हाल के एक नोट में एक्सिस सिक्योरिटीज (Axis Securities) ने  कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS)  के साथ  ही ग्लैंड फार्मा की सिफारिश की है और ये उनके टॉप पिक्स में शामिल है.

नोट में कहा गया है, “स्पुतनिक-वी, रेमडेसिविर जैसे कोविड -19 उत्पादों का निर्माण ग्लैंड फार्मा के लिए मजबूत वृद्धि के रूप में कार्य करता है, अमेरिका उत्पाद मिश्रण में टॉपलाइन बदलाव ला सकता है, जिससे तिमाही-दर-तिमाही (क्यूओक्यू) मार्जिन में सुधार हो सकता है.” ब्रोकरेज को उम्मीद है कि फार्मा कंपनी कम करों के कारण Q2 में स्थिर शुद्ध लाभ दर्ज करेगी. हालांकि, इस तिमाही में क्यूओक्यू के आधार पर कुल बिक्री में मामूली गिरावट देखने को मिलेगी और कोविड द्वारा संचालित उत्पाद से राजस्व की हानि होगी.

कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS) के लिए, दूसरी तिमाही को लेकर  एक्सिस सिक्योरिटीज ने कहा कि कम कोविड-रोगी की मात्रा कम राजस्व ला सकती है, हालांकि, उत्पाद मिश्रण में बदलाव से क्रमिक आधार पर मार्जिन में सुधार हो सकता है. KIMS के शेयरों ने इस साल जून में शेयर बाजार में पदार्पण किया. KIMS के शेयर वर्तमान में अपने IPO इश्यू मूल्य 825 रुपये प्रति शेयर से बढ़कर लगभग 1,155 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे हैं.

ब्रोकरेज फर्म एक्सिस सिक्योरिटीज ने सोमवार को एक नोट में कहा कि इंडिया फार्मा मार्केट (आईपीएम) में 16% की वृद्धि हुई है, जो गैर-कोविड -19 उत्पादों की बिक्री में उछाल और रिकवरी से प्रेरित है. यह उम्मीद करता है कि फार्मा ब्रह्मांड उच्च एकल अंकों की वृद्धि (8% YoY) की रिपोर्ट कर सकता है, जो प्रमुख रूप से इंजेक्टेबल्स और जेनेरिक सेगमेंट द्वारा संचालित है.

ब्रोकरेज फर्म एक्सिस सिक्योरिटीज ने सोमवार को एक नोट में कहा कि इंडिया फार्मा मार्केट (आईपीएम) में 16% की वृद्धि हुई है, जो गैर-कोविड -19 उत्पादों की बिक्री में उछाल और रिकवरी से प्रेरित है. ब्रोकरेज फर्म उम्मीद करती है कि फार्मा यूनिवर्स हाई सिंगर डिजिट ग्रोथ (8% YoY) हासिल कर सकता है, जो प्रमुख रूप से इंजेक्टेबल्स और जेनेरिक सेगमेंट द्वारा संचालित होगी.

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना ज़रूरी है की मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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How To Take Professional Loan Which Documents Are Required

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Professional Loan: अगर आपको पैसों की जरुरत है और आप डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रट्रीज जैसे प्रोफेशनल्स में शामिल हैं तो आप प्रोफेशनल लोन (Professional loan) के लिए अप्लाई कर सकते हैं. कई मामलों में यह पर्सनल लोन (Personal Loan) से ज्यादा बेहतर ऑप्शन है. प्रोफेशनल लोन उन प्रोफेशनली क्वालिफाइड लोगों को दिए जाते हैं जो व्यक्तिगत या कारोबारी के तौर पर लोगों को प्रोफेशनल सर्विस देते हैं. आज हम आपको इसी लोन के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं.

प्रोफेशनल लोन के फायदे

  • प्रोफेशनल लोन लेना काफी आसान माना जाता है
  • प्रोफेशनल लोन के लिए मिनिमम डॉक्यूमेंटशन की जरूरत पड़ती है.
  • इसकी प्रोसेसिंग फीस काफी कम होती है और कोई छिपा हुआ चार्ज भी नहीं होता.
  • इस तरह के लोन की दरें काफी प्रतिस्पर्द्धी होती हैं. हर बैंक चाहता है कि उसके पास ज्यादा से ज्यादा इस तरह के ग्राहक हों.
  • प्रोफेशनल लोन कितना मिलेगा, यह आपकी जरुरत और मौजूदा जिम्मेदारियों देख कर तय होता है. इसमें ग्राहक की क्रेडिट हिस्ट्री भी अहम भूमिका निभाती है.
  • इस लोन में आंशिक भुगतान या प्री-पेमेंट करने पर कोई चार्ज नहीं लगता है. लेकिन ग्राहक को अपने स्रोत से इसे चुकाना होता है.
  • अगर कस्टमर भविष्य में ज्यादा लोन लेना चाहता है तो उसे टॉप-अप भी मिल जाता है.
  • हालांकि प्रोफेशनल लोन के लिए तय किए गए नियम और शर्तें बैंकों के हिसाब से बदलती हैं.

लोन मंजूर करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन

  • प्रोफेशनल लोन मंजूर करने की प्रक्रिया में किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करने होते हैं और न पोस्ट डेटेड चेक देने होते हैं.
  • सारी प्रक्रिया ऑनलाइन ई-साइनिंग के जरिए होती है.
  • ईएमआई पेमेंट के लिए e-NACH का इस्तेमाल किया जाता है.

इन डॉक्यूमेंट्स की पड़ती है जरुरत: –

  • प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन का प्रूफ
  • केवाईसी डॉक्यूमेंट
  • बैंक स्टेटमेंट
  • रोजगार या बिजनेस का प्रूफ

पर्सनल लोन से सस्ता है प्रोफेशनल लोन

  • प्रोफेशनल लोन, पर्सनल लोन से सस्ता होता है.
  • स्वरोजगार करने वाले या सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल के लिए लोन की दरें 9.99 फीसदी से शुरू होती है.
  • जबकि पर्सनल लोन की दरें 12 फीसदी से शुरू होती है.

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Multibagger Stock Tips There Is A Plan To Buy Banking Stocks The Brokerage Firm Has Advised To Buy These 4 Stocks

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Multibagger Stock:  ब्रोकरेज फर्म शेयरखान (Sharekhan) ने अपने लेटेस्ट Q2FY2022 रिजल्ट प्रीव्यू में लार्ज कैप बैंकिंग सेक्टर से आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और एसबीआई के शेयरों को खरीदने का सुझाव दिया है. जानते हैं ब्रोकरेज फर्म का इस बारे में क्या कहना है.

ब्रोकरेज फर्म ने कहा, “हम निजी बैंकों और चुनिंदा पीएसयू बैंकों को लेकर पॉजिटिव हैं. निजी बैंकों के भीतर, हमारा पेकिंग ऑर्डर (pecking order) आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक है. पीएसयू बैंकों में,  एसबीआई हमारी प्राथमिकता हैं, लेकिन हम मानते हैं कि बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे अन्य बड़े पीएसयू बैंकों में भी कोई वैल्यू खोज सकता है.”

आईसीआईसीआई बैंक को ब्रोकरेज फर्म ने ‘खरीदें’ रेटिंग दी है. शेयरखान के मुताबिक आईसीआईसीआई बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.8 फीसदी पर स्थिर रहेगा. वहीं एक्सिस बैंक के लिए नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.5-3.6% पर स्थिर रहने की उम्मीद है. शेयरखान के अनुसार, पीएसयू बैंकों में परिसंपत्ति गुणवत्ता स्थिर होने और निजी बैंकों में सुधार की प्रवृत्ति दिखने की उम्मीद है.

ब्रोकरेज ने कहा, “निजी क्षेत्र के बैंकों के अग्रिमों में अपेक्षाकृत बेहतर वृद्धि और कम प्रावधानों के साथ, क्रेडिट लागत को नियंत्रण में रखते हुए बेहतर प्रदर्शन की संभावना है. निजी बैंकों के भीतर, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एचडीएफसी बैंक समकक्षों की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं.”

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना ज़रूरी है की मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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Keep These 4 Things In Mind While Taking Health Insurance Otherwise You May Have To Pay Money At The Time Of Need

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Health Insurance Tips: कोरोना संकट के बाद से लोगों में हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) को लेकर जागरुकता बढ़ी है. लोग अब ज्यादा से ज्यादा हेल्थ इंश्योरेंस करा रहे हैं. हालांकि अगर आप सोचते हैं कि हेल्थ इंश्योरेंस कराने के बाद आपको इलाज का खर्च नहीं उठाना पड़ेगा तो यह सही नहीं है. हर परिस्थिति में बीमा कंपनी आपके इलाज का खर्च उठाए ऐसा जरुरी नहीं है.

कुछ ऐसे प्वाइंट्स भी हैं जहां पर बीमा कंपनियां इलाज का खर्च उठाने के लिए बाध्य नहीं होती हैं. और किसी भी हेल्थ इंश्योरेंस या पॉलिसी को लेने से पहले उन बातों की जानकारी होना बहुत ही जरुरी है. अगर आपने हाल ही में कोई हेल्थ पॉलिसी ली है या फिर कोई बीमा पॉलिसी लेने के बारे में विचार कर रहे हैं तो इन खास बातों का पहले जान लें.

वेटिंग पीरियड में नहीं कर सकते क्लेम
पॉलिसी लेने पर शुरुआती कुछ समय तक के लिए बीमा कंपनियों द्वारा एक निश्चित अवधि निर्धारित की जाती है. जिसमें कोई भी पॉलिसी धारक किसी भी परिस्थिति में खर्च के लिए क्लेम नहीं कर सकता. इस अवधि को वेटिंग पीरियड के नाम से जाना जाता है. ये अवधि 1 महीने या 3 महीने तक की हो सकती है. इसका सीधा सा अर्थ ये है कि अगर आपने कोई पॉलिसी आज खरीदी है तो वेटिंग पीरियड तक आप उस पॉलिसी के तहत क्लेम नहीं कर सकते हैं.

24 घंटे एडमिट रहने का नियम है जरुरी
अगर आप हेल्थ इंश्योरेंस के तहत क्लेम करना चाहते हैं तो इसके लिए जरुरी है कि आप अस्पताल में कम से कम 24 घंटे एडमिट रहे हो. यानि तबीयत खराब होने पर अस्पताल में 1 दिन तो जरुर एडमिट रहना होगा. इसके दस्तावेज़ सब्मिट करने के बाद ही आप बीमा कंपनी से राशि क्लेम कर सकते हैं.

बीमारियों के पहले से होने पर ये हैं नियम
अगर आपका शरीर पहले से ही कई बीमारियों का घर है और आपने हाल ही में हेल्थ इंश्योरेंस लिया है या लेने जा रहे हैं तो घबराने की जरुरत नहीं हैं क्योंकि बीमा कंपनियां पहले से बीमारी होने पर भी उन्हें कवर करती हैं लेकिन पेंच ये है कि इसके लिए आप 36 से 48 महीनों के बाद ही कवर कर सकते हैं. यानि कुछ कंपनिया इसके लिए 36 महीनों का वेटिंग पीरियड रखती हैं तो कुछ 48 महीनों का. इसका मतलब ये है कि आपको इस सुविधा के लिए एक लंबा इंतज़ार करना पड़ता है. ऐसे में अगर बीच में आपके स्वास्थ्य में गिरावट आती है तो अस्पताल का खर्चा आपको खुद ही उठाना पड़ेगा.

महंगा पड़ सकता है कोपे का विकल्प
को पे(Co Pay) नाम से इसका मतलब स्पष्ट है. जिसका अर्थ है खर्च में हिस्सेदारी. हेल्थ इंश्योरेंस लेते वक्त यह विकल्प भी मिलता है. इसका अर्थ है कि अगर किसी की तबीयत खराब होती है तो अस्पताल का खर्च बीमा कंपनियों के साथ साथ बीमा धारक व्यक्ति भी उठाता है. मान लीजिए अस्पताल में कुल खर्च का 90 फीसदी हिस्सा बीमा कंपनी देगी तो वहीं 10 फीसदी हिस्सा पॉलिसी खरीदने वाले को देना होता है. लेकिन चूंकि इसमें आपको ज्यादा डिस्काउंट नहीं मिलता इसीलिए ये विकल्प आपको महंगा पड़ सकता है.

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