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Hyundai Creta | Hyundai Creta

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Volkswagen Taigun vs Hyundai Creta:  Hyundai Creta वर्तमान में एक महीने में 12-3k यूनिट्स की बिक्री के साथ सेगमेंट लीडर है और 9 महीने के करीब वेटिंग लिस्ट में भी है. यह स्पष्ट है कि नई Volkswagen Taigun टारगेट भी यही सेगमेंट है, लेकिन क्या Creta की तुलना में Taigun अलग खरीदार वर्ग को टारगेट करना चाहती है. आखिर Taigun क्रेटा को कितना मुकाबला दे सकती है. जानते हैं.

एक्सटीरियर
दोनों ही कॉम्पैक्ट एसयूवी हैं और हमारी सड़कों के हिसाब से सही आकार के मामले में काफी आकर्षक हैं. ये दोनों न तो बहुत छोटी हैं और न ही बहुत बड़ी हैं, जबकि दोनों ही एग्रेसिव डिजाइन डिटेल के साथ प्रीमियम दिखते हैं.

Creta अपने नए जनरेशन अवतार में हिट रही है जबकि पुराने मॉडल से बिल्कुल अलग है. इसमें एक बड़ी ग्रिल के साथ-साथ हेडलैम्प को भागों में लगाया गया है. डिजाइन बड़ा और अधिक राउंड है.

Volkswagen Taigun vs Hyundai Creta: दोनों SUVs में क्या है खास, कौन सी गाड़ी है बेहतर

Taigun में एक विशाल क्रोम ग्रिल है, जबकि Creta के विपरीत, Taigun अधिक चौकोर आकार की है, लेकिन फुल लेंथ वाला रियर टेल-लाइट सेट-अप सबसे आकर्षक हिस्सा है. Creta, ताइगुन से थोड़ी लंबी है और इसकी लंबाई 4,300 मिमी बनाम Taigun की 4,221 मिमी है. चौड़ाई के मामले में Creta 1800 मिमी है जबकि Taigun 1,760 मिमी में आता है.

इंटीरियर
दोनों के केबिनों के फीचर्स से भरपूर होने के साथ-साथ हाई क्वालिटी वाले भी हैं. Creta में 10.25-इंच टचस्क्रीन के साथ-साथ क्वालिटी पर ध्यान देने के साथ-साथ चार स्पोक स्टीयरिंग हैं. Taigun के लिए भी यही कहा जा सकता है लेकिन इसमें तीन स्पोक स्टीयरिंग व्हील और सिल्वर एक्सेंट के साथ स्पोर्टियर फोकस है.

दोनों की फीचर लिस्ट काफी लंबी है और कई मामलों में समान है लेकिन कुछ अंतर भी हैं. एक बड़ी टचस्क्रीन, डिजिटल डायल, वायरलेस चार्जिंग, कनेक्टेड तकनीक, सनरूफ, रियर व्यू कैमरा, हवादार सीटें, एयर प्यूरीफायर दोनों में हैं. 

Volkswagen Taigun vs Hyundai Creta: दोनों SUVs में क्या है खास, कौन सी गाड़ी है बेहतर

Creta में एक पैनोरमिक सनरूफ, इलेक्ट्रिक पार्किंग ब्रेक और संचालित ड्राइवर स्टैंडर्ड सनरूफ और एक मैनुअल हैंडब्रेक ताइगुन के मुकाबले उसे आगे ले जाते हैं. Taigun 2,651 mm बनाम 2,610 mm पर व्हीलबेस के मामले में क्रेटा आगे निकलती है लेकिन दोनों कारों में लेगरूम अच्छा है जबकि क्रेटा का थोड़ा चौड़ा है और इसमें अधिक हेडरूम है.

इंजन
इंजन की बात करें तो Taigun केवल 1.0 TSI या 1.5 TSI के साथ टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन ऑफर करता है.  1.0 TSI , 113bhp/175Nm पैदा करता है जबकि 1.5 TSI , 147bhp/250Nm बनाता है. 1.0 TSI या तो 6-स्पीड मैनुअल या 6-स्पीड ऑटोमैटिक के साथ है. 1.5 TSI में 6-स्पीड मैनुअल या 7-स्पीड DSG हो सकता है.

Creta रेंज 113bhp / 144Nm के साथ 1.5l पेट्रोल से शुरू होती है जो या तो 6-स्पीड मैनुअल या CVT ऑटोमैटिक के साथ आती है. फिर 138bhp / 250Nm के साथ 1.4l टर्बो पेट्रोल है जो केवल क्रेटा में 7-स्पीड DCT के साथ आता है.

Volkswagen Taigun vs Hyundai Creta: दोनों SUVs में क्या है खास, कौन सी गाड़ी है बेहतर

दोनों एसयूवी में उनके टर्बो पेट्रोल के साथ पैडल शिफ्टर्स हैं. याद रखें कि क्रेटा में 1.5 लीटर यूनिट वाला डीजल भी है. दोनों SUVs का आधिकारिक माइलेज उनके टर्बो पेट्रोल इंजन के लिए लगभग 17kmpl है. 

कीमत
Creta की रेंज 10.16 लाख रुपये से शुरू होती है और टॉप-एंड के लिए 17.87 लाख रुपये तक जाती है. Taigun रेंज 10.49 लाख रुपये से शुरू होती है और 17.49 लाख रुपये तक जाती है. यह स्पष्ट है कि यह सेगमेंट दोनों के लिए काफी बड़ा है और हमें लगता है कि Taigun अधिक ड्राइवर केंद्रित है. ताइगुन में 1.5 टीएसआई के साथ अधिक शक्ति है जबकि निचले स्पेक वेरिएंट में अभी भी टर्बो पावर है. इसलिए एक परफॉर्मंस ओरिएंटिड पैकेज के रूप में Taigun प्रभावित करती है जबकि क्रेटा को अधिक सुविधाओं के साथ-साथ इंजन के मामले में अधिक विकल्प के साथ एक बड़ा केबिन मिलता है.

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How To Take Professional Loan Which Documents Are Required

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Professional Loan: अगर आपको पैसों की जरुरत है और आप डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रट्रीज जैसे प्रोफेशनल्स में शामिल हैं तो आप प्रोफेशनल लोन (Professional loan) के लिए अप्लाई कर सकते हैं. कई मामलों में यह पर्सनल लोन (Personal Loan) से ज्यादा बेहतर ऑप्शन है. प्रोफेशनल लोन उन प्रोफेशनली क्वालिफाइड लोगों को दिए जाते हैं जो व्यक्तिगत या कारोबारी के तौर पर लोगों को प्रोफेशनल सर्विस देते हैं. आज हम आपको इसी लोन के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं.

प्रोफेशनल लोन के फायदे

  • प्रोफेशनल लोन लेना काफी आसान माना जाता है
  • प्रोफेशनल लोन के लिए मिनिमम डॉक्यूमेंटशन की जरूरत पड़ती है.
  • इसकी प्रोसेसिंग फीस काफी कम होती है और कोई छिपा हुआ चार्ज भी नहीं होता.
  • इस तरह के लोन की दरें काफी प्रतिस्पर्द्धी होती हैं. हर बैंक चाहता है कि उसके पास ज्यादा से ज्यादा इस तरह के ग्राहक हों.
  • प्रोफेशनल लोन कितना मिलेगा, यह आपकी जरुरत और मौजूदा जिम्मेदारियों देख कर तय होता है. इसमें ग्राहक की क्रेडिट हिस्ट्री भी अहम भूमिका निभाती है.
  • इस लोन में आंशिक भुगतान या प्री-पेमेंट करने पर कोई चार्ज नहीं लगता है. लेकिन ग्राहक को अपने स्रोत से इसे चुकाना होता है.
  • अगर कस्टमर भविष्य में ज्यादा लोन लेना चाहता है तो उसे टॉप-अप भी मिल जाता है.
  • हालांकि प्रोफेशनल लोन के लिए तय किए गए नियम और शर्तें बैंकों के हिसाब से बदलती हैं.

लोन मंजूर करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन

  • प्रोफेशनल लोन मंजूर करने की प्रक्रिया में किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करने होते हैं और न पोस्ट डेटेड चेक देने होते हैं.
  • सारी प्रक्रिया ऑनलाइन ई-साइनिंग के जरिए होती है.
  • ईएमआई पेमेंट के लिए e-NACH का इस्तेमाल किया जाता है.

इन डॉक्यूमेंट्स की पड़ती है जरुरत: –

  • प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन का प्रूफ
  • केवाईसी डॉक्यूमेंट
  • बैंक स्टेटमेंट
  • रोजगार या बिजनेस का प्रूफ

पर्सनल लोन से सस्ता है प्रोफेशनल लोन

  • प्रोफेशनल लोन, पर्सनल लोन से सस्ता होता है.
  • स्वरोजगार करने वाले या सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल के लिए लोन की दरें 9.99 फीसदी से शुरू होती है.
  • जबकि पर्सनल लोन की दरें 12 फीसदी से शुरू होती है.

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Multibagger Stock Tips There Is A Plan To Buy Banking Stocks The Brokerage Firm Has Advised To Buy These 4 Stocks

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Multibagger Stock:  ब्रोकरेज फर्म शेयरखान (Sharekhan) ने अपने लेटेस्ट Q2FY2022 रिजल्ट प्रीव्यू में लार्ज कैप बैंकिंग सेक्टर से आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और एसबीआई के शेयरों को खरीदने का सुझाव दिया है. जानते हैं ब्रोकरेज फर्म का इस बारे में क्या कहना है.

ब्रोकरेज फर्म ने कहा, “हम निजी बैंकों और चुनिंदा पीएसयू बैंकों को लेकर पॉजिटिव हैं. निजी बैंकों के भीतर, हमारा पेकिंग ऑर्डर (pecking order) आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक है. पीएसयू बैंकों में,  एसबीआई हमारी प्राथमिकता हैं, लेकिन हम मानते हैं कि बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे अन्य बड़े पीएसयू बैंकों में भी कोई वैल्यू खोज सकता है.”

आईसीआईसीआई बैंक को ब्रोकरेज फर्म ने ‘खरीदें’ रेटिंग दी है. शेयरखान के मुताबिक आईसीआईसीआई बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.8 फीसदी पर स्थिर रहेगा. वहीं एक्सिस बैंक के लिए नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.5-3.6% पर स्थिर रहने की उम्मीद है. शेयरखान के अनुसार, पीएसयू बैंकों में परिसंपत्ति गुणवत्ता स्थिर होने और निजी बैंकों में सुधार की प्रवृत्ति दिखने की उम्मीद है.

ब्रोकरेज ने कहा, “निजी क्षेत्र के बैंकों के अग्रिमों में अपेक्षाकृत बेहतर वृद्धि और कम प्रावधानों के साथ, क्रेडिट लागत को नियंत्रण में रखते हुए बेहतर प्रदर्शन की संभावना है. निजी बैंकों के भीतर, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एचडीएफसी बैंक समकक्षों की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं.”

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना ज़रूरी है की मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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Keep These 4 Things In Mind While Taking Health Insurance Otherwise You May Have To Pay Money At The Time Of Need

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Health Insurance Tips: कोरोना संकट के बाद से लोगों में हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) को लेकर जागरुकता बढ़ी है. लोग अब ज्यादा से ज्यादा हेल्थ इंश्योरेंस करा रहे हैं. हालांकि अगर आप सोचते हैं कि हेल्थ इंश्योरेंस कराने के बाद आपको इलाज का खर्च नहीं उठाना पड़ेगा तो यह सही नहीं है. हर परिस्थिति में बीमा कंपनी आपके इलाज का खर्च उठाए ऐसा जरुरी नहीं है.

कुछ ऐसे प्वाइंट्स भी हैं जहां पर बीमा कंपनियां इलाज का खर्च उठाने के लिए बाध्य नहीं होती हैं. और किसी भी हेल्थ इंश्योरेंस या पॉलिसी को लेने से पहले उन बातों की जानकारी होना बहुत ही जरुरी है. अगर आपने हाल ही में कोई हेल्थ पॉलिसी ली है या फिर कोई बीमा पॉलिसी लेने के बारे में विचार कर रहे हैं तो इन खास बातों का पहले जान लें.

वेटिंग पीरियड में नहीं कर सकते क्लेम
पॉलिसी लेने पर शुरुआती कुछ समय तक के लिए बीमा कंपनियों द्वारा एक निश्चित अवधि निर्धारित की जाती है. जिसमें कोई भी पॉलिसी धारक किसी भी परिस्थिति में खर्च के लिए क्लेम नहीं कर सकता. इस अवधि को वेटिंग पीरियड के नाम से जाना जाता है. ये अवधि 1 महीने या 3 महीने तक की हो सकती है. इसका सीधा सा अर्थ ये है कि अगर आपने कोई पॉलिसी आज खरीदी है तो वेटिंग पीरियड तक आप उस पॉलिसी के तहत क्लेम नहीं कर सकते हैं.

24 घंटे एडमिट रहने का नियम है जरुरी
अगर आप हेल्थ इंश्योरेंस के तहत क्लेम करना चाहते हैं तो इसके लिए जरुरी है कि आप अस्पताल में कम से कम 24 घंटे एडमिट रहे हो. यानि तबीयत खराब होने पर अस्पताल में 1 दिन तो जरुर एडमिट रहना होगा. इसके दस्तावेज़ सब्मिट करने के बाद ही आप बीमा कंपनी से राशि क्लेम कर सकते हैं.

बीमारियों के पहले से होने पर ये हैं नियम
अगर आपका शरीर पहले से ही कई बीमारियों का घर है और आपने हाल ही में हेल्थ इंश्योरेंस लिया है या लेने जा रहे हैं तो घबराने की जरुरत नहीं हैं क्योंकि बीमा कंपनियां पहले से बीमारी होने पर भी उन्हें कवर करती हैं लेकिन पेंच ये है कि इसके लिए आप 36 से 48 महीनों के बाद ही कवर कर सकते हैं. यानि कुछ कंपनिया इसके लिए 36 महीनों का वेटिंग पीरियड रखती हैं तो कुछ 48 महीनों का. इसका मतलब ये है कि आपको इस सुविधा के लिए एक लंबा इंतज़ार करना पड़ता है. ऐसे में अगर बीच में आपके स्वास्थ्य में गिरावट आती है तो अस्पताल का खर्चा आपको खुद ही उठाना पड़ेगा.

महंगा पड़ सकता है कोपे का विकल्प
को पे(Co Pay) नाम से इसका मतलब स्पष्ट है. जिसका अर्थ है खर्च में हिस्सेदारी. हेल्थ इंश्योरेंस लेते वक्त यह विकल्प भी मिलता है. इसका अर्थ है कि अगर किसी की तबीयत खराब होती है तो अस्पताल का खर्च बीमा कंपनियों के साथ साथ बीमा धारक व्यक्ति भी उठाता है. मान लीजिए अस्पताल में कुल खर्च का 90 फीसदी हिस्सा बीमा कंपनी देगी तो वहीं 10 फीसदी हिस्सा पॉलिसी खरीदने वाले को देना होता है. लेकिन चूंकि इसमें आपको ज्यादा डिस्काउंट नहीं मिलता इसीलिए ये विकल्प आपको महंगा पड़ सकता है.

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